|| सूर्य संसार की आत्मा है ||
: वेद सत्य स्वयं ओंकार सर्वेश्वर

पंडित विजय रावल ( गुरु स्व.पंडित छगन मेहता सिद्धवट तीर्थ पुरोहित ) विज्ञानं के स्नातक जोकि वेद -संस्कृत एवं ज्योतिर्विज्ञान विभाग ,विक्रम विश्व विध्यालय -उज्जैन के वैदिक स्कॉलर हैं जहाँ इन्होने नवग्रह वैदिक अनुष्ठानम ,सूर्य ग्रह जनित योग ,कालसर्प योग जैसे विषयों पर शोध कार्य किया है .

पंडित विजय रावल विगत कई से अधित वर्षों से नवग्रह शांति अनुष्ठानम जोकि जन्मकुंडली में उपस्थित योगों के आधार पर विशेष मुहुर्त में किया जाता है अपने देश विदेश के यजमानो के लिए कराते रहें हैं .

सभी अनुष्ठानों में पहले जन्मकुंडली का अध्ययन कर ग्रह,नक्षत्रो एवं योगो के आधार पर विशेष मुहुर्त में सभी शांति अनुष्ठानम किये जातें हैं . इस प्रकार के सभी अनुष्ठानो के पूजाओं के सर्वाधिक संकल्प पत्रकों के संकलन का विश्व कीर्तिमान पंडित विजय रावल के नाम होकर गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं.

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"भारतीय वैदिक भविष्यफल का सही चित्रण"

भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र वर्तमान जीवन का प्रतिदिन का हिस्सा बन गया है ज्योतिष शास्त्र की गाइड लाइन प्रतिदिन का विचार विषय बन गया है।

जबकि वैदिक ज्योतिषशास्त्र का सिद्धि रुप प्रतिपादन उपयोगिता में हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार वेदों के विशिष्ट वैदिक मंत्रो को नवग्रह वैदिक अनुष्ठान के लिए उपयोग किया जाता हैं। प्राचीन समय में हमारे ऋषि मुनि विशिष्ठ अनुष्ठान पूजा के लिये इन्ही वेद मंत्रो का प्रयोग करते थे। उससे यजमान (पूजा/अनुष्ठान प्रतिपादन करने वाले) को लाभ होता है। जो इसके लिए इच्छा रखते थे।

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